शिक्षकों के लिए पिकनिक मनाने का अड्डा हैं सरकारी स्कूल

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JNI NEWS : 01-09-2016 | By : जेएनआई डेस्क | In : Uncategorized

स्कूलों में मोटी तनख्वाह पाने वाले शिक्षक उड़ा रहे शिक्षा का मखौल
शिक्षा पर भारी खर्च करने के बावजूद भी सुधर नही पा रही सरकारी स्कूलों की तस्वीर
कांधला(चौहान)। भारत सरकार भले ही सरकारी स्कूलों की शिक्षा पर मोटा खर्च कर रही है, शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद भी सरकारी स्कूलों के हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसा इस कारण नही हो पा रहा है कि इसमें सरकार की कुछ कमीं हैं, ऐसा इसलिए हो रहा है कि इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक मोटी तनख्वाह पाने के बावजूद भी हाथ-पांव हिलाना गंवारा नही समझते। इसके चलते ८० प्रतिशत अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी के बजाय प्राईवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। यहां तक की खुद सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापक भी अपने बच्चों को प्राईवेट में पढऩे के लिए भेज रहे हैं। अब सवाल उठता है कि तो फिर हालात कैसे सुधर सकते हैं?
सरकार स्कूलों में मिड डे मील, निशुल्क पुस्तकें, ड्रेस, स्कूल बैग आदि बंटवा रही है। यहां पर पढऩे वाले बच्चों की शिक्षा भी निशुल्क हैं, लेकिन इसके बावजूद भी कोई अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना नही चाहता। ऐसे में यह सवाल उठना अनिवार्य हो जाता है कि इतनी सुविधाएं होने के बावजूद भी आज अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूल की ओर क्यों भाग रहे है। एक सर्वे के अनुसार सरकार इतना खर्च करने के बाद भी शिक्षा का स्तर नही सुधार पायी है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकारी स्कूलों में तैनात ३० से ५० हजार की तनख्वाह पाने वाले शिक्षक हैं। यें शिक्षक इन स्कूलों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने के बजाय सिर्फ पिकनिक मनाने के लिए ही पहुंचते हैं। सरकार द्वारा दी गई तनख्वाह से ऐसोआराम का जीवन जी रहे इन शिक्षकों को बच्चों के भविष्य की कोई परवाह नही है। ऐसे में लोगों को मजबूरी वश प्राईवेट स्कूलों में लूटपाट का शिकार होना पड़ रहा है। सरकारी शिक्षकों की तुलना में प्राईवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले सिर्फ दो या पांच हजार की तनख्वाह वाले शिक्षक ही बेस्ट नजर आते हैं। यें शिक्षक प्राईवेट स्कूलों में कठिन मेहनत करने के बावजूद भी बामुश्किल ही खर्चा पानी चला पाते हैं। फिर भी वें सरकारी स्कूलों में पिकनिक मनाने के लिए पहुंचने वाले शिक्षकों से तो सही ही हैं, क्योंकि वें मामूली सैलरी मिलने के बावजूद भी अपने पेशे से गद्दारी नही कर रहे हैं।

अधिकारी भी नही कर पाते कार्रवाई
काधला। करीब एक माह पूर्व क्षेत्र के गांव सलेमपुर के प्राथमिक विद्यालय में मीडियाकर्मियों के पहुंचने पर करीब ४० बच्चे उपस्थित मिले थे, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए वहां पर एक भी शिक्षक मौजूद नही था। मीडियाकर्मियों ने जिला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया था, इसके बाद अधिकारी ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किया था, लेकिन आज तक अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हो पाई। इसके चलते स्कूल के हालात अब भी पूर्व की भांति ही चल रहे हैं।

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